VR Flight Simulators: क्या सिम्युलेटर पायलट प्रशिक्षण का स्थान ले सकते हैं?

VR Flight Simulators: क्या वे पूरी तरह परंपरागत पायलट प्रशिक्षण का स्थान ले सकते हैं?

8 दशकों से भी अधिक समय से, पायलट फ्लाइट सिम्युलेटरों पर प्रशिक्षण लेते आ रहे हैं। इस पूरे समय के दौरान बहुत से तकनीकी अनुसंधान हुए हैं। वर्ष 2019 में, वर्चुअल रियलिटी पायलट प्रशिक्षण का एक ऐसा नया और पेशेवर रूप बन गई, जो एविएशन उद्योग में अविश्वसनीय और रोमांचकारी परिणाम देने में सक्षम है।

इस बात को लगभग एक सदी हो चुकी है कि निजी जेट उड़ाने वालो से लेकर वायु सेना में स्टील्थ बॉम्बर के पायलट तक सभी फ्लाइट सिम्युलेटरों पर प्रशिक्षण लेते आ रहे हैं। अब, जिस तरह फ्लाइट प्रशिक्षु उड़ान भरना सीखते हैं, वह आज के समय की महान तकनीकी खोज बन गया है। VR प्रणाली के जरिये पायलटों को प्रशिक्षण देने से पेशेवर फ्लाइंग स्कूल्स को लाभ मिल है, अब वे सस्ते में शिक्षा दे पा रहे हैं और इस तरह अमेरिका की सरकार को वायु सेना के रक्षा बजट को कम करने में मदद मिली है। एरोनॉटिक्स मैकेनिकों को भी इस प्रणाली में उनके साथ प्रशिक्षण दिया जा सकता है। आइये कुछ उदाहरण देखते हैं जो बताएंगे कि VR फ्लाइट सिम्युलेटर एविएशन विज्ञान के क्षेत्र में समय के साथ किस तरह लाभकारी सिद्ध होंगे।

आधुनिक फ़्लाइट सिम्युलेटर कैसे काम करते हैं


आमतौर पर फ्लाइट सिम्युलेटर बनाने के लिए हवाई जहाज का सामने का हिस्सा यानि कॉकपिट अलग कर दिया जाता है और फिर इस पर षटकोण आकार का प्लेटफार्म लगा दिया जाता है जिससे प्लेन का जुड़ा हुआ हिस्सा छह डिग्री पर घूम सकता है। पायलट को रनवे या लैंडस्केप का नज़ारा दिखाने में लिए, इसके अंदर वीडियो डिस्प्ले लगाए जाते हैं।

फ्लाइट सिम्युलेटर का प्रयोग करके प्रशिक्षु पायलटों को एक कॉकपिट में असल जिंदगी जैसी परिस्थितियों में काम करने का मौका दिया जाता है। सिम्युलेटर के प्रयोग से ईंधन की खपत बचाकर, तथा सामान्य रखरखाव और लगातार मैकेनिकों के काम की जरूरत न होने के कारण बहुत सा धन व समय बचाया जा सकता है, और किसी भी पायलट या यात्री को नुकसान पहुंचाए बगैर, पायलट को चुनौती देने के लिए खतरनाक परिस्थितियां और माहौल के साथ-साथ सिस्टम फेल होने जैसी चीजें डाली जा सकती है।

फ्लाइट सिम्युलेटर नामक उन्नत प्रौद्योगिकी का प्रयोग करके गतिविधियों के केंद्र, हवाई यातायात नियंत्रण, और दृश्य आदि के बारे में सिखाया जाता है। इसमें क्या-क्या किया जा सकता है इसका एक उदाहरण होगा – वायु घर्षण से हवाई जहाज के ढाँचे पर पड़ने वाले दबाव का अहसास करने के लिए FS लगाकर आकाशीय दिशाओं का अभ्यास करने के लिए प्रशिक्षुओं के समक्ष वैसी ही परिस्थिति प्रस्तुत करना| हवाईअड्डे पर पायलट के देखने हेतु आवश्यक हर चीज का सैटेलाईट व्यू एक 180-डिग्री फील्ड का प्रयोग करके प्रदान किया जाता है|

मूल रूप से, FS के चार स्तर होते थे जिन्हें A से D तक ग्रेड दिए जाते थे और इसमें D सर्वोत्तम स्टैण्डर्ड था| हाल ही में, इन चार स्तरों को अंतर्राष्ट्रीय रूप से बढ़ाकर सात स्तर कर दिया गया था जिसमें D टाइप 7 था, दोनों ही प्रशिक्षणों में प्रारम्भिक (हवाईजहाज के विभिन्न प्रकारों में बदलना) और व्यावसायिक हवाई जहाज कर्मियों के सतत शैक्षणिक प्रशिक्षण (हर व्यावसायिक पायलट के लिए नियमित प्रशिक्षण जरुरी है, आमतौर पर हर छह महीने में, ताकि उनकी यात्रा सूची में CAT हवाई जहाजों में यात्री विमानों की अनुमति मिल सके) टाइप 7/स्तर D अब मानक बन गया है|

हमेशा से काम करते आ रहे तरीकों को क्यों बदला जाए?

फ्लाइट सिम्युलेटर काफी महंगे हो सकते है, काफी जगह घेरते हैं और बहुत भारी होते हैं, जिन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए भारी मशीनों की लागत आती है| उदाहरण के लिए, पूरी फ्लाइट के टाइप 7 की लागत तकरीबन $12 मिलियन आती है, और इसमें संचालन लागत शामिल नहीं है| जब पुराने मॉडल के हवाई जहाज को एक थोड़े आधुनिक संस्करण से बदलना पड़ता है, तो ये खर्चे और भी अधिक बढ़ जाते हैं| इसलिए, वर्तमान में, पायलटों को प्रशिक्षण देने में मिलिट्री का अधिकांश बजट खर्च हो जाता है और पायलट बनने की आकांक्षा रखने वालों के लिए यह खर्च आमतौर पर वहन करने के लिए बहुत ही ज्यादा होता है|

क्या पायलटों के लिए VR प्रशिक्षण एक वास्तविकता बन जाएगा?

हाल ही के वर्षों में, एवियोनिक्स उद्योग में लोगों के बीच मतभेद रहा है जिसमें कई लोग यह प्रश्न उठाते है पायलटों को प्रशिक्षण देने में वर्चुअल रियलिटी कितनी प्रभावी है| ऐसे लोग भी है जो सालों से परीक्षा पर खरे उतर रहे वर्तमान फ्लाइट सिम्युलेटरों पर निर्भरता के चलते उनके स्थान पर मार्केट में मौजूद कुछ भी और लेकर आना असंभव मानते हैं| ऐसी परिस्थितियों के बारे में भी चिंता व्यक्त की जाती है जब कि धुंए से भरे कॉकपिट में ऑक्सीजन मास्क उठाना हो या प्लेन उड़ाते समय पायलट की सीट में हलके कम्पन को समझना हो, ऐसे में चीजें वास्तविक नहीं लग पाएंगी| यद्यपि हाल-फ़िलहाल के सालों में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है कि भौतिक सिम्युलेटर href=”https://vrgal.net/category/virtual-reality/”> वर्चुअल रियलिटी विकल्प से किसी भी मायने में कमतर थे| लेकिन, वायु सेना में प्रशिक्षण कार्यों में और कुछ निजी फ्लाइंग सिखाने वाले स्कूलों में ट्युटोरिअल के साथ-साथ VR का प्रयोग किया जा रहा है|

यूनाइटेड स्टेट्स की वायु सेना में PTN नामक एक प्रोग्राम का प्रयोग किया जाता है जो उन्नत बायोमेट्रिक्स, डाटा एनालिटिक्स, ऑगमेंटेड व वर्चुअल रियलिटी, तथा आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस सहित बहुत सी तकनीकों का सम्मिश्रण है ताकि पायलटों को अधिक तेजी से, कम दाम में और सीखने की परिस्थितियों में फोकस के साथ प्रशिक्षण दिया जा सके| सबसे पहला PTN कार्यक्रम अगस्त 2018 में शुरू हुआ था और इसके अंतर्गत 20 पायलटों को 20 सप्ताह तक प्रशिक्षण दिया गया| केवल चार महीनों बाद, उनमें से 13 ने सफलतापूर्वक ग्रेजुएट डिग्री पाई| सामान्य तौर पर पायलटों को ग्रेजुएट होने के लिए एक साल का प्रोग्राम पूरा करना पड़ता है|

VR का प्रयोग करके पायलट प्रशिक्षण के क्षेत्र में भविष्य में क्या होने वाला है?

एक दशक से थोड़े अधिक समय पहले तक वर्चुअल रियलिटी केवल एक फंतासी हुआ करती थी, जो अब वीडियो गेमिंग की दुनिया में अपने आप में मुख्यधारा की चीज बन गई है| फिर भी, 2016 तक, 230 से अधिक कम्पनियाँ वर्चुअल रियलिटी के क्षेत्र में उत्पाद बना रही थीं और वे कोई छोटे व्यवसाय नहीं थे बल्कि सैमसंग, गूगल, सोनी, अमेज़न, एप्पल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कम्पनियाँ इस क्षेत्र में अग्रणी थी| फिर वर्ष 2018 में, फेसबुक का वैरिफोकल प्रोटोटाइप डिस्प्ले आया जिसका नाम हाफ डोम था| वर्चुअल रियलिटी के साथ इस तरह के प्रयोग के कारण उपभोक्ता की डिवाइस के भार या आकार को बढ़ाए बगैर भी 140 डिग्री नज़ारा ऑफर करते हुए असीमित दूरी को पास और दूर दृष्टि से देखना संभव हो ग़या|

VR प्रौद्योगिकी का वर्तमान प्रयोग मल्टी-प्रोजेक्शन्स और हेडसेट के माध्यम से वातावरण का सृजन है जो उपयोगकर्ताओं को ऐसा अहसास कराता है जैसे वे वास्तव में उस वर्चुअल परिस्थिति में मौजूद हों| अब, वर्चुअल रियलिटी के क्षेत्र में नई तकनीकी प्रगति ने, हैप्टिक प्रणाली नामक तकनीक के जरिये पायलटों के लिए प्रशिक्षण के समय वास्तविक हवाई जहाज के महत्वपूर्ण सेंसेशन का अनुभव करने के साथ -साथ कम्पन महसूस करना भी संभव बना दिया है| PTSD के इलाज और मिलिट्री प्रशिक्षण में वर्चुअल तकनीक में प्रगति के बहुत अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं|

फ्लाइट स्कूल भी पुराने वीडियो ट्युटोरियल के स्थान पर नई प्रौद्योगिकी का लाभ उठा रहे हैं| VR का लाभ उठाने वाली पहली कुछ कंपनियों में से एक ऑस्ट्रेलिया में स्थित थी| पायलटों के मुख्य प्रशिक्षक ने नए वर्चुअल प्रशिक्षण अनुभव को तैयार करने के लिए फिल्म प्रोडक्शन टीम का प्रयोग किया जिसमें मोबाइल वर्चुअल रियलिटी हेडसेट और स्मार्ट फ़ोन का प्रयोग शामिल था ताकि उनके छात्र उड़ान की मूलभूत बातों को सीख सकें| अब आप VR सर्टिफिकेशन के साथ पायलट कोर्स के लिए पंजीकरण करा सकते हैं और इतना ही नहीं, और भी बहुत कुछ आने वाला है|

आइए अभी उपलब्ध कुछ सबसे उन्नत हेडसेट्स पर नज़र डालते हैं


वर्तमान में हेडसेट या तो टेथरड होते हैं या मोबाइल| आप एक सेलफ़ोन के साथ एक मोबाइल हेडसेट को जोड़ सकते हैं जो किसी भी स्मार्टफोन को एक वायरलेस वर्चुअल रियलिटी डिवाइस बना देता है| आपके मोबाइल फ़ोन के लिए Google DayDream और Samsung Gear कुछ सबसे सस्ते हेडसेट हैं| टेथरड हेडसेट आपको पोजीशन को सटीक तरीके से पता करने की क्षमता के साथ काफी निपुण होते हैं| लैपटॉप या डेस्कटॉप की तुलना में स्मार्टफोन की कमतर क्षमताओं के विपरीत, टेथरड VR हेडसेट एक अधिक गहन और अधिक वास्तविक फ्लाइट अनुभव देता है|

शुरुआत करने के लिए उपयोगकर्ता के पास निम्न उपकरण होने चाहिए:

  •       एक वर्चुअल रियलिटी फ्लाइट कंप्यूटर
  •       एक उन्नत प्रकार का VR हेडसेट
  •       रडर पैडल्स
  •       VR फ्लाइट सॉफ्टवेर
  •  एक एयरप्लेन जॉयस्टिक या कंट्रोल योक

हैप्टिक प्रद्योगिकी अभी सार्वजानिक उपयोग के लिए उपलब्ध नहीं है, लेकिन हाल के बदलाव मैकेनिकल एक्चुएटरों को अपना रहे हैं, जो आपके शरीर के हिस्सों को छूने वाली डिवाइसे हैं, बहुधा प्रयोग में, आपके उँगलियों के सिरे और हाथ शामिल है, जिससे कोई व्यक्ति वर्चुअल रियलिटी के सेंसेशन को महसूस कर पाता है| जब फ्लाइट प्रशिक्षण में प्रयोग के लिए इनका निर्माण किया गया तो इससे VR पायलटो को उन डायलों और स्विचों को पहचानने में मदद मिली जिनका वे वास्तव में प्रयोग करेंगे|

फ्लाइट सॉफ्टवेर जो आपका मन मोह लेंगे

इस प्रोग्राम का सॉफ्टवेर इतना वास्तविक है कि ये अत्यधिक लोकप्रिय हो गया है| X Plane 11 में नए फीचर्स हैं यूजर इंटरफ़ेस को हाई डेफिनिशन में अपग्रेड करके, वास्तविकता और हवाई जहाज के पुर्जों की उच्च गुणवत्ता वाली बारीकी का काफ़ी करीब से अहसास कराते हैं|

इसे पर्सनल कम्प्यूटर के लिए शीर्ष फ्लाइट सिम्युलेटरों में से एक माना जाता है जिसमें एक अविश्वसनीय रूप से वास्तविक पहलु नज़र आता है| जब वर्चुअल फ्लाइट लेते समय, आप असली से दिखने वाले इंस्ट्रूमेंट पैनल के साथ एक बहुत बारीकी से बने कॉकपिट में  प्रवेश करने की चुनौती का सामना करेंगे, तो आप भूल जाएंगे कि आप एक गेम खेल रहे हैं|

Aerofly2 3डी ग्राफिक्स वाला एक अविश्वसनीय फ्लाइट सॉफ्टवेर VR प्रोग्राम है जैसा आपने पहले कभी नहीं देखा होगा, और उड़ान भर रहे तथा आने वाले पायलटो के लिए उड़ान की डायनामिक्स बनाने के लिए बिल्कुल वास्तविक लगते हैं| इसकी वास्तविकता में बारीकी से बना कॉकपिट और दक्षिण पश्चिम अमेरिका के सुन्दर दृश्य के साथ शानदार एरोबोटिक्स भौतिकी शामिल है|

VR को एरोनॉटिक्स उद्योग और पायलटों के लिए व्यवस्थित बनाना

वर्ष 2020 में, एविएशन के एक भाग के रूप में वर्चुअल रियलिटी की अब उपेक्षा नहीं की जा रही है| हालांकि, VR के साथ फ्लाइट सिम्युलेशन आकाश में बहुत बड़े जहाज को उड़ाने के असल अनुभव से बहुत अलग हो सकता है, लेकिन एविएशन में करियर बनाने का सपना देखने वाली नई पीढ़ी की व्यापक आवश्यकताओं के लिए, उच्चतम रेटिंग वाले सिम्युलेटरों की बढ़ती लागत के भरोसे नहीं रहा जा सकता|

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